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VOL. 4, ISSUE 11 (2017)
अब्दुल बिस्मिल्लाह: कथानायक की जीवन दृष्टि एवं स्वरूप
Authors
रविशंकर पाठक
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र अब्दुल बिस्मिल्लाह: कथानायक की जीवन दृष्टि एवं स्वरूप पर आधारित है। अब्दुल बिस्मिल्लाह के लेखन की शुरुआत कविता और कहानी के रूप में एक साथ हुई। प्रारम्भ में उनकी कहानियों का विषय प्रेम हुआ करता था। अपने प्रारम्भिक रचनाकाल में वे बंगला के शरतचंद्र और हिन्दी के जयशंकर प्रसाद से प्रभावित हुए। इसलिए उनकी आरम्भिक प्रेम कहानियों में प्रेम को भावात्मक धरातल पर अभिव्यक्ति मिली है। इस संग्रह की प्रेमपरक कहानियाँ ‘‘मादा सारस की कातर आँखें, पटाक्षेप, जीनिया के फूल और दावत प्रमुख हैं। ‘दावत’ अब्दुल बिस्मिल्लाह की प्रारम्भिक कहानी होते हुए भी वस्तु और शिल्प के दृष्टि से सशक्त है।
लेखक के निजी अनुभव में उनकी जीवन दृष्टि लोक व्यवस्था के सत्य विधान की ओर शुभ संकेत का मूलाधार है। वे समाज की आन्तरिक कमजोरी पहचानते हैं। इसलिए विस्मिल्लाह जी समानता की नयी रचनाभूमि पर महनीय साहित्यिक मूल्यों को दृढ़ करने की बात सोचते हैं। लेखक की यह बड़ी इच्छा है कि इस समाज में ऊँच-नीच, जाति-पांति, वर्ण, धर्म का भेदभाव मिटाकर हम अन्धविश्वास और रूढ़ियों से मुक्त होकर समाज में यथार्थवाद और मानवतावाद की प्रतिष्ठा करें। अब्दुल बिस्मिल्लाह का निजी अनुभव मानवीय करुणा से ओत-प्रोत और क्रान्तिकारी भावधारा का श्रोत कहा जा सकता है। इस देश में जो जन दलित, उपेक्षित, असहाय तथा भूख से बिलबिलाते हुए जन हैं वे अब्दुल बिस्मिल्लाह के स्नेहभाजन हैं। सचमुच बिस्मिल्लाह के साहित्य सृजन में निजी अनुभव की जीवन दृष्टि उन्नत है। संसार में जहाँ साँस लेने का भी सुविधा नहीं है वहाँ निष्ठुरता है। भारत देश में निश्च्छल प्राणों पर ही लोग प्रहार कर रहे हैं। उनकी दृष्टि में इस देश में केवल स्वार्थ है और वह स्वार्थ जहाँ चाहे जन सेवा हो या चाहे देश सेवा।
अब्दुल बिस्मिल्लाह के सम्पूर्ण कथा साहित्य में उपेक्षित तथा दलित पात्रों के उन्नयन और जनसाधारण की प्रतिष्ठा के प्रति गहरी आस्था के दर्शन होते हैं।
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Pages:223-228
How to cite this article:
रविशंकर पाठक "अब्दुल बिस्मिल्लाह: कथानायक की जीवन दृष्टि एवं स्वरूप". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 11, 2017, Pages 223-228
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