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VOL. 3, ISSUE 8 (2016)
विधवाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सूक्ष्म अवलोकन
Authors
डाॅ0 मोहम्मद इसरार खाँ, रविन्द्र कुमार
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र प्राथमिक सर्वेक्षण पर आधारित है तथा चयनित ग्राम पंचायत में ग्रामीण दाम्पत्य एवं वैधव्य जीवन का विश्लेषण करता हुआ विधवाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का वर्णन करता है। ग्रामीण क्षेत्र में स्त्रियाँ, विशेषतया वह स्त्रियाँ जो कम उम्र में विधवा होती हैं, एक ओर तो मानसिक व भावात्मक रूप से परेशान होती है तथा दूसरी ओर परिवार का मुखिया उन पर अनेक प्रकार से अत्याचार करता है उनसे नौकरानी के रूप में घर में सभी कार्य कराता है और कोई-कोई परिवार का मुखिया उनको सम्पत्ति से बेदखल करके अपने परिवार से अलग कर देता है। तब विधवा अपने माता-पिता या अन्य रिश्तेदारी में रहती हैं जिससे विधवा की कई जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। जब वह अपनी जीविका चलाने के लिए घर से बाहर काम करने जाती हैं तो वह महिलाओं के साथ प्रतिदिन घटित हो रही घटनाओं को देखती हैं जिसका एक बड़ा मानसिक व भावात्मक धक्का विधवा को लगता है। उसके दिल में खौफ भर जाता हैं। वह अन्दर से टूट जाती है और धीरे-धीरे अपनी मानसिक व गुणात्मक क्षमता को खो देती है उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली जाती है तथा वह निर्धनता के दुष्चक्रो में फंसी रह जाती है।
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Pages:407-413
How to cite this article:
डाॅ0 मोहम्मद इसरार खाँ, रविन्द्र कुमार "विधवाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सूक्ष्म अवलोकन". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 8, 2016, Pages 407-413
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