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VOL. 3, ISSUE 8 (2016)
समग्र स्वास्थय संरक्षण में कुण्डलिनी योग की भूमिका : एक अध्ययन
Authors
डाॅ0 निष्कर्ष शर्मा
Abstract
कुण्डलिनी योग विद्या एक प्रकृष्ट विज्ञान है और उस विज्ञान के अनुसार विश्व ब्रह्माण्ड के मूल में केवल एक तत्त्व है जिसे परमतत्त्व कहते हैं। सृष्टि के प्राक्काल में वही परमतत्त्व दो भागों में विभक्त होकर शिव और शक्ति पर वाचक होता है। यही शिव और शक्ति का योग कुण्डलिनी योग कहलाता है। जब मनुष्य प्राणायाम के द्वारा कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करता है तब मनुष्य में स्थित सप्त चक्र जागृत होकर मनुष्य को विभिन्न विभुतियों से अलंकृत कर नवीन ऊर्जा का संचरण करते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप मनुष्य की सभी ग्रन्थियों व समस्त तंत्रों की व्याध्यिाँ नष्ट होती है।
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Pages:394-395
How to cite this article:
डाॅ0 निष्कर्ष शर्मा "समग्र स्वास्थय संरक्षण में कुण्डलिनी योग की भूमिका : एक अध्ययन". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 8, 2016, Pages 394-395
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