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VOL. 3, ISSUE 4 (2016)
अग्नि देवता एवं होम का अध्ययन
Authors
डॉ. वेद प्रकाश मिश्र, कृष्ण कुमार भास्कर
Abstract
समस्त शुभ कार्याें में अग्निदेव की उपस्थिति अनिवार्य मानी गई हैं, शास्त्रों में अग्नि देव के वास का विधान बताया गया है, अग्नि देवताओं का मुख है शास्त्रानुसार अग्निदेव के तीन स्थान बताये गये हैं-1. स्वर्ग 2. पाताल 3. भूमि तथा इसी के अनुसार अग्निदेव के पूजा का विधान बताया गया हैं। मनुष्य, देवताओं, असुरों, एवं सभी जीवमात्र के समस्त कर्मो का साक्षी अग्नि देव को माना जाता हैं। सभी कार्य उनके संरक्षण में रहने के कारण बिना किसी बाधा के संपूर्ण हो जाते है। अग्निदेवता पृथिवी स्थानीय है। ऋग्वेद के पुरूष सूक्त के अनुसार अग्नि की उत्पत्ति विराटपुरूष के मुख से हुई है।
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Pages:241-243
How to cite this article:
डॉ. वेद प्रकाश मिश्र, कृष्ण कुमार भास्कर "अग्नि देवता एवं होम का अध्ययन". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 4, 2016, Pages 241-243
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