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VOL. 3, ISSUE 1 (2016)
पश्चिमी मध्यप्रदेश के जनजातीय जिलों में जनजातियों की समस्याएँ एवं सुझाव
Authors
डाॅ. जी. सी. खिमेसरा, श्री नोंदराम मालवीय
Abstract
देश का सर्वांगीण विकास तब तक सम्भव नहीं है जब तक उसमें रहने वाले प्रत्येक नागरिक पूर्ण सहयोग प्रदान न करें। आजादी के 68 वर्ष होने के बावजूद जनजातीय समुदाय के विकास में कमियाँ रही हैं। संविधान के मौलिक अधिकार और समानता के सिद्धांतों ने स्थिति को स्पष्ट किया है। भारत में एक नगरीय जीवन की चकाचैंध हैं तो दूसरी ओर जनजातीय समुदाय का वह भाग जो समाज की मुख्य धारा से अछूता है जिसकी अपनी कोई पहचान नहीं है, और न ही अधिक स्वतंत्रता है। आज जनजातीय समुदाय विकास की हौड़ में पीछे रह गया है। इस समुदाय का शैक्षिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी स्तर पिछड़ा है।
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Pages:244-245
How to cite this article:
डाॅ. जी. सी. खिमेसरा, श्री नोंदराम मालवीय "पश्चिमी मध्यप्रदेश के जनजातीय जिलों में जनजातियों की समस्याएँ एवं सुझाव". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2016, Pages 244-245
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