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VOL. 4, ISSUE 8 (2017)
प्रचलित तालों का परिचय
Authors
शुभम वर्मा
Abstract
तीन ताल उत्तर भारतीय संगीत का सर्वाधिक लोकप्रिय एवं प्रचलित ताल है। तीन ताल मध्य, द्रुत और अतिद्रुत लयों में बजाने के लिए अत्यन्त उपयुक्त ताल है। एक ताल-आधुनिक ख्याल गायकी के युग में विलम्बित लय में बजाया जाने वाला सबसे अधिक प्रचलित ताल एक ताल है। एक ताल में पेशकार, कायदा, टुकड़ा, परन आदि सभी कुछ बजाया जाता है। रूपक ताल तबले की ताल है। रूपक ताल में पेशकार, कायदा, टुकड़ा, परन आदि सभी कुछ बजाया जाता है। झपताल का प्रयोग ख्याल अंग की गायकी, तन्त्र वाद्यों की गतों तथा तबले पर स्वतंत्र वादन में भी किया जाता है। उत्तर भारतीय संगीत के दो आधार तालों में एक दादरा ताल है। यह लोक संगीत, भाव संगीत, फिल्म संगीत, ग़ज़ल एवं भजन आदि के साथ संगत करने का एक अत्यन्त प्रचलित और लोकप्रिय ताल है। उत्तर भारत में कहरवा ताल का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह ताल का प्रयोग ठुमरी, गज़ल, भजन, लोकगीत आदि गायन शैलियों में होता है। इस ताल को यदि लोक अवनद्य वाद्यों का आधार ताल मानें तो अनुपयुक्त न होगा।
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Pages:290-291
How to cite this article:
शुभम वर्मा "प्रचलित तालों का परिचय". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 8, 2017, Pages 290-291
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