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VOL. 4, ISSUE 5 (2017)
संगीत में लय एवं ताल का महत्व
Authors
शुभम वर्मा
Abstract
भारतीय संगीत गायन, वादन एवं नृत्य तीनों विधाओं का मिश्रण है और इन्हीं से संगीत जैसा पवित्र शब्द पूर्ण रूप से सार्थक है। ललित कलाओं में संगीत कला सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। संगीत के दो मुख्य उपादान हैं- स्वर एवं लय। इन्हीं उपादानों के माध्यम से संगीतज्ञ संगीत का सृजन करता है किन्तु संगीत कला में लय का स्थान अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। लय के बिना स्वर की उत्पत्ति असंभव है। संगीत में लय एवं ताल का प्रयोग प्राचीन काल से हो रहा है। ताल के बिना भी संगीत अधूरा है। निश्चित ताल गति के परिणामस्वरूप संगीत के क्रमिक आरोह, अवरोह, विराम आदि अत्यंत प्रभावशाली हो जाते हैं। वास्तव में संगीत की प्रत्येक विधा गायन, वादन एवं नृत्य में लय एवं ताल का प्रयोग अत्यंत ही महत्वपूर्ण है।
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Pages:363-364
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शुभम वर्मा "संगीत में लय एवं ताल का महत्व". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 5, 2017, Pages 363-364
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