ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 4 (2017)
भारतीय संगीत में बंदिशों की महत्ता
Authors
शुभम वर्मा
Abstract
‘बंदिश’ का अरà¥à¤¥ है बंधा हà¥à¤†à¥¤ जो रचना किसी राग के चलन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सà¥à¤µà¤°à¥‹à¤‚ में, किसी ताल व लय में à¤à¤µà¤‚ किसी कावà¥à¤¯ में बंधी होती है, उसे बंदिश कहते हैं। सामानà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में हम बंदिश को सीमा à¤à¥€ कहते हैं। बंदिश का महतà¥à¤µ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ राग संगीत, लोक संगीत, और सà¥à¤—म संगीत सà¤à¥€ में है। बंदिश à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का दरà¥à¤ªà¤£ है जिसमें रागों के सà¥à¤µà¤°à¥‚प, उस समय के रीति-रिवाजों का सà¥à¤µà¤°à¥‚प और à¤à¤—वदॠसà¥à¤µà¤°à¥‚प की à¤à¤¾à¤à¤•ी मिलती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संगीत में बंदिश की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से चली आ रही है। संगीत जगत में बंदिशों का बड़ा महतà¥à¤µ है और इसमें कोई अतिशयोकà¥à¤¤à¤¿ नहीं है कि बंदिश à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संगीत की अनà¥à¤°à¥à¤¤à¤†à¤¤à¥à¤®à¤¾ है।
Download
Pages:322-323
How to cite this article:
शुभम वर्मा "भारतीय संगीत में बंदिशों की महत्ता". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 4, 2017, Pages 322-323
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
