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VOL. 4, ISSUE 4 (2017)
वैश्विक जल संकट एवं पीने के सुरक्षित पानी का अधिकार
Authors
डॉ0 धर्मेन्द्र कुमार सिंह
Abstract
विश्व के सम्पूर्ण जल संसाधन में से मात्र 0.008 प्रतिशत ही मनुष्य के लिए उपयोगी है, इसमें से भी 30 प्रतिशत पानी प्रदूषित हो चुका है। वर्ष 2025 तक दुनिया की 35 प्रतिशत जनसंख्या जो 52 देशों में रह रही है पानी की कमी महसूस करेगी और इससे विकास भी प्रभावित होगा। आने वाले समय में जल संकट इतना विकराल रूप धारण कर सकता है कि इससे युद्व व विनाश जन्म ले सकता है। भारत में भी सुरक्षित पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है इसी कारण इसे कमोडिटी (वस्तु) के रूप में देखा जाने लगा है और पीने पानी का बाजार बढ़ता जा रहा है। जिस पर लगाम की आवश्यकता है, क्योंकि मानव हेतु जल एक आधारभूत आवश्यकता है और उसको प्राप्त करना उसका मूलभूत अधिकार है क्योंकि यह जीवन के अधिकार से सीधे जुड़ा है। इसीलिए यह राज्य का जिम्मेदारी है कि मानक के अनुसार 5 गैलन साफ और सुरक्षित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होनी चाहिए तथा गरीबों को यह निःशुल्क प्राप्त होनी चाहिए।
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Pages:313-315
How to cite this article:
डॉ0 धर्मेन्द्र कुमार सिंह "वैश्विक जल संकट एवं पीने के सुरक्षित पानी का अधिकार". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 4, 2017, Pages 313-315
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