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VOL. 4, ISSUE 4 (2017)
पुराणों में नारी का स्वरूप
Authors
चन्द्रशेखर
Abstract
आधुनिक युग में देखा जाय तो नारियाँ प्रतिस्पर्धा के कारण सभी मान्यताओं को ताख पर रखकर आगे बढ़ रही हैं। आये दिन ये नारियाँ वासनाओं का शिकार हो रही हैं, पति-पत्नी के बीच अच्छा सामंजस्य न होने के कारण विवाह-विच्छेद हो रहा है। जिसमें आने वाली पीढ़ियाँ उसका शिकार हो रही हैं। जहाँ पुराणों में नारी को विशेष सम्मान दिया जाता था वहीं आज वे पश्चिमी सभ्यता के चलन में लीन हो गयी हैं। हमारी सभ्यता दिनों दिन छिनती जा रही है। नारियों को समाज में स्थान मिला है लेकिन पुराणों में पूजनीय नारी के समान नहीं। नारी का सती धर्म ही उसके कल्याण का एक उपाय है। पुरुष वर्ग को उनका सहयोग करके आगे बढ़ाना चाहिए। इससे समाज व राष्ट्र का विकास होगा। इसी के माध्यम से माँ और नारी का जो पौराणिक युग में स्थान था वह हमें दुबारा देखने को मिल सकता है।
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Pages:279-280
How to cite this article:
चन्द्रशेखर "पुराणों में नारी का स्वरूप". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 4, 2017, Pages 279-280
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