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VOL. 4, ISSUE 11 (2017)
अमोल बटरोही : जीवन वृत्त एवं व्यक्त्तिव
Authors
अर्चना द्विवेदी
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र अमोल बटरोही का जीवन वृत्त एवं व्यक्त्तिव का अध्ययन पर आधारित है। परिवार के उद्गम के लिये गत्यात्मक परिस्थितियों के संदर्भ में डार्विन के विकासवादी सिद्धान्त की स्वीकृति हुई। इसके अनुसार मनुष्य में वातावरण की शक्ति के सन्तुलन में अपने प्रभुत्व के द्वारा अस्तित्व की प्रतिष्ठा का भाव सदैव विद्यमान रहा है। इसी भाव ने सभ्यता के विकास के साथ-साथ ‘एक दूसरे के प्रति सहयोग तथा सहिष्णुता’ की प्रवृत्ति की शक्ति प्रदान की और फलतः एक संगठन का आधार निर्मित हुआ है। बटरोही जी का जन्म एक ऐसे गाँव में और परिवार में हुआ, जहाँ पुरानी रूढ़िया, परम्परायें और अंध विश्वासों के मेले लगे रहते हैं। इनके परिवार की परम्परा पूजा पाठ एवं भजन कीर्तन तक ही सीमित न होकर गाँव की पंचायत एवं लेन-देन के लेखा-जोखा तक पहुँचती थी। जमीन का बंटवारा भी इनके पिता और पितामह किया करते थे। इसलिए बटरोही जी के जीवन में इस तमाम पारिवारिक विशेषताओं का पूर्ण प्रभाव पड़ा। और इसी प्रभाव के कारण उनके काव्य में उन सभी बिन्दुओं का जीता जागता प्रमाण मिलता है। अंधविश्वास और ढांेग ने तो कवि के मानस को उद्वेलित कर दिया है। किसी भी महान रचनाकार के व्यक्तित्व की समीक्षा उसके समस्त कृतित्व एवं नित्य प्रति की सृजनशीलता के आधार पर ही की जा सकती है।
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Pages:207-212
How to cite this article:
अर्चना द्विवेदी "अमोल बटरोही : जीवन वृत्त एवं व्यक्त्तिव". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 11, 2017, Pages 207-212
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