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VOL. 3, ISSUE 8 (2016)
योद्धा सन्यासी का सार्वभौम धर्म
Authors
डाॅ० सरिता चैहान
Abstract
विवेकानन्द मूलतः एक चिन्तक थे। उनका मूल क्षेत्र अध्यात्म था। वेदान्त को आधार बनाकर उन्होने केवल हिन्दू धर्म का ही नहीं वरन् सभी धर्मों का विश्लेषण किया है। विवेकानन्द ने धर्म को व्यापकतम् अर्थ में स्थापित करते हुए सार्वभौम धर्म का प्रतिपादन किया। धर्म को विज्ञान के साथ जोड़कर दोनों को एक ही दिशा में अग्रसर बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि धर्म अथवा आध्यात्मिकता किसी प्रकार के पूजा-पाठ, दिखावे या कर्मकांड में निहित नहीं हैं, वरन् मनुष्य के देवत्व के विकास में है। धर्म और साम्प्रदायिकता नितान्त भिन्न हैं। विवेकानन्द का धर्म सम्पूर्ण विश्व को साथ लेकर चलने वाला एक ऐसा मानव धर्म है जो भेद भावों को त्याग कर मानव-मात्र के कल्याण पर बल देता है। उन्होने राजनीति में आध्यात्मिकता को शामिल करने की बात कही और इस प्रकार से राजनीति और प्रकारान्तर से विश्व का कल्याण किया। विवेकानन्द ने ‘सार्वभौम धर्म’ की एक ऐसी कसौटी हमें प्रदान की जिसके आधार पर हम अपने और समाज के धार्मिक होने की पड़ताल निस्संदेह कर सकते हैं।
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Pages:382-383
How to cite this article:
डाॅ० सरिता चैहान "योद्धा सन्यासी का सार्वभौम धर्म". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 8, 2016, Pages 382-383
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