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VOL. 3, ISSUE 7 (2016)
हिंदी के मनोवैज्ञानिक उपन्यास
Authors
वनिता उप्पल
Abstract
उन्नीसवीं सदी के अंतिम दौर में ’परीक्षा गुरु’ और ’भाग्यमती’ जैसे उपन्यासों के साथ हिंदी उपन्यास लेखन परम्परा का आग़ाज़ माना जाता है। इस विधा के विकास की दृश्टि से प्रेमचन्द काल काफ़ी महत्वपूर्ण रहा, किन्तु अभी तक हिंदी उपन्यास में एक कमी थी-इसमें पात्रों के बाहरी जीवन का चित्रण ही रहता था, उनके मनोभावों और भीतरी उधेड़बुन का चित्रण प्रेमचन्दोत्तर युग की प्रधान प्रवृत्ति बना। हिंदी की मनोवैज्ञानिक कथा-धारा के प्रमुख उपन्यासकार रहे- इलाचन्द्र जोशी, जैनेन्द्र और अज्ञेय। इनके अलावा देवराज उपाध्याय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, राजेन्द्र यादव, लक्ष्मीनारायण लाल इत्यादि के उपन्यास भी मानव-मनोविज्ञान से ओत-प्रोत दिखाई देते हैं।
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Pages:95-97
How to cite this article:
वनिता उप्पल "हिंदी के मनोवैज्ञानिक उपन्यास". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 7, 2016, Pages 95-97
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