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VOL. 3, ISSUE 2 (2016)
भारतीय राज्य व्यवस्था में केन्द्र-राज्य सम्बन्ध : एक परिचय
Authors
डाॅ. रोहित कुमार
Abstract
भारतीय संधवाद संविधान सभा में केन्द्रीय शक्ति समिति के प्रतिवेदन के प्रस्तुतिकरण के समय से ही एक गहन अध्ययन एवं गंभीर विवाद का विषय रहा है। संविधान सभा के सदस्यों एवं राजनैतिक पंडितो के मध्य इस बात को लेकर पारस्परिक मतभेद रहा कि भारतीय व्यवस्था क्या वास्तव में संघीय है, अर्द्ध संघीय है या एकात्मक। इसमें कुछ संघीय प्रवृत्तियाँ हैं। यह भी एक विवाद का विषय रहा है कि भारत में संघीय व्यवस्था अपनाये जाने की आवश्यकता ही क्या है। जबकि इस व्यवस्था में एकलवादी संहसंघवादी एकीकीकरण एवं अत्याधिक केन्द्रीयकृत व्यवस्था को अपनाया गया है। वस्तुतः जब भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी और संविधान निर्माण का कार्य प्रांरभ किया था तो उस समय विश्व में उदारवादी चिंतक विद्यमान थे। इस परिपेक्ष में भारत द्वारा लोकतंत्र एवं संघवाद का प्रयोग एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक विषय बन गया था किन्तु भारतीय व्यवस्था का सार तत्व उसके भू-राजनैतिक परिस्थितियों पर आधारित है। संघवाद मंे केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकारों के संबंधों की एक विषेश प्रणाली होती है। यह अतः सम्बन्ध सामायिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। विश्व के सभी संघात्मक संविधान द्वारा स्थापित मौलिक व्यवस्था में परिस्थितियों के परिवर्तन के साथ नये स्वरूप सामने आये है। इसी प्रकार भारतीय संबैधानिक व्यवस्था में भी कई परिवर्तन तथा नये समीकरण सामने उभर कर आये हैं।
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Pages:258-259
How to cite this article:
डाॅ. रोहित कुमार "भारतीय राज्य व्यवस्था में केन्द्र-राज्य सम्बन्ध : एक परिचय". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2016, Pages 258-259
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