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VOL. 1, ISSUE 5 (2014)
उत्तराखण्ड में संस्कृत साहित्य की परम्परा
Authors
Devesh Kumar Mishra
Abstract
उत्तराखण्ड में प्राप्त संस्कृत में अंकित अभिलेखों, ताम्रपत्रों आदि के साथ-साथ उपलब्ध प्राचीन संस्कृत साहित्य में साहित्यकारों के विषय में उल्लेख मिलता है। प्रसिद्ध है कि उईन्न्ाराखण्ड को देव भूमि कहा जाता है। यह क्षेत्र पुरातन काल से ही देवी-देवताओं की निवासस्थली रहा है। यहाÂँ की प्रत्येक घाटी, शिखर, वनखण्ड किसी न किसी ऋषि-मुनि या देवी-देवता के नाम पर हंै। अतः निश्चय रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि इसी कारण देववाणी Â(संस्कृतÂ) का प्रभाव भी यहाÂँ पर रहा होगा, किन्तु उपलब्ध प्रमाणों, विभिन्न अभिलेखों, ताम्रपत्रों एवं शिलालेखों में तथा समय-समय पर प्राप्त प्राचीन संस्कृत साहित्य की पाण्डुलिपियों में ऐसी सूचना अवश्य प्राप्त होती है जिससे पता चलता है कि उत्तराखण्ड में संस्कृत साहित्य की परम्परा नवीन न होकर प्राचीन थी।
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Pages:151-153
How to cite this article:
Devesh Kumar Mishra "उत्तराखण्ड में संस्कृत साहित्य की परम्परा". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 1, Issue 5, 2014, Pages 151-153
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