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VOL. 2, ISSUE 12 (2015)
असम प्रांत के संत कवि शंकरदेव और माधवदेव के रचनाओं में भारत वर्णन : एक अध्ययन
Authors
जयन्त कुमार बोरो
Abstract
शंकरदेव और माधवदेव के आविर्भाव समय को असमीय साहित्य में मध्ययुग की संज्ञा से अभिहित किया जाता है। यह समय भक्ति काल का समय रहा है। शंकरदेव ने समग्र उत्तरपूर्वी प्रांत में भक्ति आन्दोलन की लहर को फैलाया। तथा समस्त जनता को एक नये भक्ति मार्ग से जोड़ने का प्रयास किया। यह नवीन भक्ति मार्ग ‘नव वैष्णव भक्ति मार्ग या धर्म’ के नाम से जाना जाता है। शंकरदेव के शिष्य माधवदेव ने अपने गुरु के कार्य को और अधिक विस्तार किया। असम एक विविध जाति एवं जनजातियों वाला प्रांत है, इसकी जनताओं में जो मेल मिलाप देखने को मिलता है उसका एकमात्र श्रेय इन दो गुरुओं (शंकर और माधव) को ही जाता है। उनकी रचनाओं में भारत का वर्णिन मिलना सम्प्रदायिक सद्भावना, सांस्कृतिक और भाषा-भाषी एकता को प्रदर्शित करता है। ‘नव वैष्णव धर्म’ की प्रधान विशेषता है- ‘एकेश्वरवाद’ की स्थापना करना। इस भक्तिमार्ग को ‘एक शरणनाम धर्म’ अथवा ‘ईश्वर के प्रति परम् आत्म-समर्पण करना का पक्षधर धर्म भी कहाँ जाता है।
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Pages:115-120
How to cite this article:
जयन्त कुमार बोरो "असम प्रांत के संत कवि शंकरदेव और माधवदेव के रचनाओं में भारत वर्णन : एक अध्ययन". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 2, Issue 12, 2015, Pages 115-120
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