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VOL. 2, ISSUE 11 (2015)
सेवासदन में नारी मनोविज्ञान
Authors
बबली
Abstract
'सेवासदन' प्रेमचन्द का बहुचर्चित उपन्यास है। प्रेमचन्द पहले उर्दू में लिखते थे और बाद में हिन्दी में ‘सेवासदन’ उपन्यास पहले उर्दू में ‘बाजारे हुस्न’ के नाम से लिखा गया। तत्पश्चात् हिन्दी में उसका प्रकाशन सन् 1918 में हुआ। इसमें प्रेचन्द ने सामाजिक समस्याओं का निरूपण अत्यन्त यथार्थवादी ढंग से किया है। सेवासदन में नारी जीवन की अनेक समस्याओं को उठाया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सेवासदन में नारी-जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को मनौवैज्ञानिक स्तर तक समझाया है। नारी के अदृश्य अनकही अन्र्तमन स्थिति को दृश्य व शब्द रूप में चित्रित किया है। इस उपन्यास की महती उपलब्ध् िहै सहज मनोविज्ञान का आधारपूर्ण प्रयोग। प्रेमचन्द ने पात्रों के अन्र्तद्वन्द्व के चित्रण में अपने सहज मनोविज्ञान का आश्रय लिया है और अत्यन्त सफलतापूर्वक उसे निभाया है। सेवासदन में सामाजिक समस्याओं के आरोपित समाधान दिए जाने का प्रयास किया है। डाॅ. इन्द्रनाथ मदान के अनुसार ‘‘सेवासदन वह प्रथम यथार्थवादी और साहित्यिक उपन्यास था जिसने हिन्दी भाषा जनता में हचल मचा दी। हर व्यक्ति ने यह अनुभव किया कि साहित्य में एक नये नक्षत्र का उदय हुआ है।’’ प्रेमचन्द का यह उपन्यास नारी मनोविज्ञान की दृष्टि से भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
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Pages:27-30
How to cite this article:
बबली "सेवासदन में नारी मनोविज्ञान". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 2, Issue 11, 2015, Pages 27-30
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