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International Journal of
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VOL. 2, ISSUE 1 (2015)
वैश्वीकरण के दौर में अनुवाद का महत्व
Authors
डॉ. काजल पाण्डे
Abstract
मानवता की दृष्टि से सभी देशों.प्रदेशों के मनुष्य मूलतरू एक हैं पर भौगोलिकए सामाजिकए सांस्कृतिकए आर्थिकए और भाषिक सीमाएँ उन्हें एक.दूसरे से अलग कर देती हैं। इनमें भाषा की सीमा सबसे बड़ी सीमा है। विदेशों की बात तो दूर अपने ही देश में विभिन्न प्रदेशों के लोग एक.दूसरे की भाषा न समझने के कारण एक.दूसरे से अजनबी हो जाते हैं। मानव.मन स्वभावतरू सीमाओं में बंधकर रुद्ध नहीं होना चाहताए बल्कि वह इन सीमाओं को लाँघकर विश्व.भर में व्यापने के लिए तड़पता रहता है। भाषा की सीमाओं को लाँघने का सबसे बड़ा माध्यम अनुवाद है। भाषा के आविष्कार के बाद जब मनुष्य.समाज का विकास.विस्तार होता चला गया और सम्पर्कों एवं आदान.प्रदान की प्रक्रिया को अधिक फैलाने की आवश्यकता अनुभव की जाने लगीए तो अनुवाद ने जन्म लिया। इन दिनों अनुवाद सेवाओं की माँग काफी बढ़ी है। अनुवाद की जरूरत केवल साहित्य तथा अंतरूसांस्कृतिक कार्यकलापों के संवर्द्धन के लिए नहीं हैए बल्कि यह तकनीक एवं स्थानिकीकरण की प्रक्रिया के अभिन्न अंग बन चुके वैश्वीकरण के परिदृश्य में कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए भी एक अत्यावश्यक साधन है।
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Pages:353-355
How to cite this article:
डॉ. काजल पाण्डे "वैश्वीकरण के दौर में अनुवाद का महत्व". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 2, Issue 1, 2015, Pages 353-355
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