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VOL. 3, ISSUE 9 (2016)
भारतीय ग्रामीण परिवेश में अनुसूचित जाति की विधवाओं के सामाजिक-आर्थिक जीवन का एक सूक्ष्म अध्ययनः ग्राम पंचायत गुलौली, तहसील मोहम्मदी, जिला लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश के विशेश सन्दर्भ में
Authors
डाॅ0 मोहम्मद इसरार खाँ, राम नरेश
Abstract
भारतीय ग्रामीण परिवेश मे अनुसुचित जाति की विधवाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति ठीक नही है। अधिकांशतया सामाजिक-आर्थिक रुप से उन्हें किसी ना किसी पर निर्भर रहना पड़ता हैं। और वे मजबूरन बाहर के कार्यों को अपनाती है, वहाँ पर विधवाओं का सामाजिक-आर्थिक एंव शारीरिक शोशण किया जाता हैं। इससे उन पर व उनके बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता हैं। ग्रामीण परिवेश में शिक्षा का प्रतिशत कम पाया गया हेै। समाज विधवाओं का आज भी शोशण कर रहा है। विधवाओं की वर्तमान आयु का औसत 57.63 वर्ष है, निर्धारित विधवाओं का वैध्वय काल का औसत कुल 9.84 वर्ष रहा है तथा विधवाओं की विधवा होने की औसत आयु 48.15 वर्ष रही हैं। साक्षरता दर प्राथमिक आकड़ों के अनुसार 26.31 रही हैं। इन्दिरा आवास योजना का प्रतिशत 5.26 रहा हैं, विधवा पेंशन योजना का प्रतिशत 31.57 हैं, बि0 पी0 ल0 अन्त्योदय कार्ड धारक का प्रतिशत 55.26 हैं। विभाग परिवार पेंशन 60 साला पेंशन योजना का प्रतिशत 10.52 रहा हैं। और विधवाओं की सभी स्त्रोतो से आय रुपये 64, 515 प्रति वर्ष हैं। प्रति विधवा पर बच्चों का औसत 3.97 हैं, जिसमे लड़के 2.05 एवं लड़कीयाँ 1.92 हैं। विधवाओं की शादी-शुदा विताई हुई उम्र का औसत 31.84 वर्ष है।
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Pages:327-334
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डाॅ0 मोहम्मद इसरार खाँ, राम नरेश "भारतीय ग्रामीण परिवेश में अनुसूचित जाति की विधवाओं के सामाजिक-आर्थिक जीवन का एक सूक्ष्म अध्ययनः ग्राम पंचायत गुलौली, तहसील मोहम्मदी, जिला लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश के विशेश सन्दर्भ में". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 9, 2016, Pages 327-334
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