International Journal of Multidisciplinary Research and Development

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International Journal of Multidisciplinary Research and Development
Vol. 2, Issue 6 (2015)

‘राग दरबारी’ उपन्यास में स्वातंत्र्योत्तर भारत


कल्पना

श्रीलाल शुक्ल का उपन्यासराग दरबारीअपने प्रकाशन के सातवें दशक में सर्वाधिक चर्चा का विषय रहा है | इस उपन्यास में लेखक ने कटाक्ष व्यंग्य करते हुए स्वातंत्र्योत्तर भारत की स्थति का चित्रण किया है | इसमें दिखाया है कि स्वातंत्र्योत्तर भारत में जनतांत्रिक व्यवस्था की विफलताओं ने हमारे जीवन मूल्यों, आस्थाओं, विश्वासों, आदर्शों, एवं सांस्कृतिक परम्पराओं की नींव को हिलाकर रख दिया है | सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार के कारण नेताओं की जेब मात्र भर रही हैं | आजादी के बाद के समाज और जीवन व्यापी विसंगतियों के सत्य की कुरूपता को चिन्हित करने के लिए लेखक ने इस कृति मेंशिवपालगंजनामक कस्बे को केंद्र में रखकर हमारी समकालीन सच्चाई को प्रभावी एवं सटीक ढंग से चित्रित किया है | चुनाव प्रणाली पर व्यंग्य करते हुए बताया है कि किस तरह भाई भतीजावाद चलाते हुए सत्ता लगातार कुछ लोगों के बिच में ही बनी रहती है | भारतीय शिक्षा व्यवस्था का भी नंगा नाच दिखाया है | कि कहने के लिए तो स्कूल काँलेज खोले गए है परन्तु वो सिर्फ नाम के ही शिक्षा संस्थान है | उच्च शिक्षा प्राप्त किए हुए पात्ररंगनाथके माध्यम से बताया है कि वह स्थितिओं को समझते हुए भी उनमें कुछ भी सुधार नहीं करना चाहता है |
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कल्पना. ‘राग दरबारी’ उपन्यास में स्वातंत्र्योत्तर भारत. International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Volume 2, Issue 6, 2015, Pages 630-632
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