International Journal of Multidisciplinary Research and Development

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International Journal of Multidisciplinary Research and Development
International Journal of Multidisciplinary Research and Development
Vol. 1, Issue 5 (2014)

बीसवीं शताब्दी में उत्तराखण्ड की विद्वत् परम्परा


Devesh Kumar Mishra

बीसवीं शताब्दी का पूर्वार्द्ध भारत की पराधीनता, भारत के स्वतंत्रता संग्राम का समय था तो बाद का आधा भाग भारत की स्वतंत्रता के अभ्युदय एवं भारत के विकास का समय था। इस शताब्दी मंे भी उत्तराखण्ड में संस्कृत-साहित्य-सृजन की गति विद्यमान थी । इस काल मंे उत्तराखण्ड के कुमाँऊ क्षेत्र में ख्याति प्राप्त काव्यकार हुए जैसे, केदारदत्त जोशी, विद्याभूषण श्रीकृष्ण जोशी,श्रीकृष्ण पन्त, जनार्दन शास्त्री, तारादत्त जोशी, प्रेमबल्लभ शर्मा, भोलादत्त पाण्डे, तारादत्त पन्त, महामहोपाध्याय पंण्डित नित्यानन्द पंत पर्वतीय, डाॅ जयदत्त उप्रेती आदि। बीसवीं शताब्दी में गढवाल में भी संस्कृत काव्यकारों की सुदीर्घ परम्परा दिखाई देती है। इस समय में यहाँ बालकृष्ण भट्ट, हरिकृष्ण, श्रीधर प्रसाद बलूनी, जितेन्द्र चन्द्र भारतीय, शशिधर शर्मा, श्रीकान्त आचार्य, रामप्रसाद हटवाल और अशोक डबराल जैसे संस्कृत काव्यकारों का परिचय प्राप्त होता है।
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Devesh Kumar Mishra. बीसवीं शताब्दी में उत्तराखण्ड की विद्वत् परम्परा. International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Volume 1, Issue 5, 2014, Pages 148-150
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