International Journal of Multidisciplinary Research and Development

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E-ISSN: 2349-4182
P-ISSN: 2349-5979

Vol. 2, Issue 8 (2015)

डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद के भाषा संबंधी विचार और उनकी प्रासंगिकता

Author(s): गीता यादव, लक्ष्मी नारायण
Abstract: डॉ. राजेंद्र प्रसाद के भाषा संबंधी विचार, चाहे वे अंग्रेजी के विषय में हो, हिंदी के अथवा अन्य भारतीय भाषाओं के विषय में, बिल्कुल पूर्वाग्रह रहित, तर्कसम्मत और संतुलित हैं। अंग्रेजी को गुलामी की तथा जन-सामान्य से दूर की भाषा मानते हुए उसे शिक्षा के माध्यम की भाषा के रूप में वे शीघ्रातिशीघ्र समाप्त करने की वकालत करते हैं, परंतु वे अंग्रेजी सीखने के विरोधी नहीं हैं। भले ही वे हिंदी के कट्टर समर्थक माने जाते थे और हिंदी को राष्ट्रभाषा और राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना चाहते थे पर उसे शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाने की वकालत वे कभी नही करते। उनका मानना था यदि शिक्षा का मतलब छात्रों को मात्र विषयों को रटना न सिखा कर उनका विश्लेषणात्मक अध्धयन कराना है, शिक्षा का मतलब यदि मात्र पुस्तकीय ज्ञान न होकर छात्रों को अपने समय और समाज के प्रति संवेदनशील बनाना है तो यह निश्चित है कि ऐसा वह अपनी मातृभाषा में ही कर सकता है।
Pages: 382-384  |  730 Views  259 Downloads
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